Friday, February 4, 2011

gaon ki yade



बात उन दिनों की है जब हम तीसरी क्लास में पढ़ते थेlहमारे गाँव में दो पोखरा (तालाब)था जो आज भी है,एक दखिन्वारा पोखरा और दूसरा पस्चिमारा  पोखरा,पस्चिमारा पोखरा हमारे स्कूल जाने के रस्ते में ही पड़ता था,हम लोग जब कभी स्कूल से वापस लौटते थे ,तो पोखरा के पास जरुर आते थे,जिनमे हामारे अजित भैया भी रहते थे,पोखरा में हमारे कौतुहल का विषय उसमे रहने वाले पानी के साप थे,हम लोग रोज सापो का गिनती करते थे,और उनका आना जाना भी देखते थे,तालाब  पानी से लबालब भरा रहता था,जिसमे हम लोग हाथ भी धो लेते थे,उन सापो और मछालियो को देख कर जो मजा आता था ,आज सीसा के जार में कैद मछालियो को देखने में नहीं आता ,अब आज हमारे गाँव के दोनों तालाब सिमट कर छोटे हो गए है और वो साप तो अब घंटो खड़े रहने से भी नहीं मिलते ,सायद अब वो हमारे पुराने दिन वापस नहीं आएंगे और जो आज देखने को मिल रहा है कल वो भी न मिले ,इसलिए कम से कम अज भी खुल कर जी लीजिये.